1 अच्छे लोग चले गये किन्तु
2 किन्तु शान्ति आयेगी
3 “हे चुड़ैलों के बच्चों, इधर आओ।
4 हे विद्रोहियों और झूठी सन्तानों,
5 तुम सभी लोग हरे पेड़ों के तले झूठे देवताओं के कारण
6 नदी की गोल बट्टियों को तुम पूजना चाहते हो।
7 तुम उन ऊँची जगहों पर जाया करते हो
8 और फिर तुम उन बिछौने के बीच जाते हो
9 तुम अपना तेल और फुलेल लगाते हो
10 इन बातों को करने में तूने परिश्रम किया है।
11 तूने मुझको कभी नहीं याद
12 तेरी ‘नेकी’ का मैं बखान कर सकता था और तेरे उन धार्मिक कर्मों का जिनको तू करता है, बखान कर सकता था।
13 जब तुझको सहारा चाहिये तो तू उन झूठे देवों को जिन्हें तूने अपने चारों ओर जुटाया है,
14 रास्ता साफ कर! रास्ता साफ करो!
15 वह जो ऊँचा है और जिसको ऊपर उठाया गया है,
16 मैं सदा—सदा ही मुकद्दमा लड़ता रहूँगा।
17 उन्होंने लालच से हिंसा भरे स्वार्थ साधे थे और उसने मुझको क्रोधित कर दिया था।
18 मैंने इस्राएल की राहें देख ली थी।
19 उन लोगों को मैं एक नया शब्द शान्ति सिखाऊँगा।
20 किन्तु दुष्ट लोग क्रोधित सागर के जैसे होते हैं।
21 “दुष्ट लोगों के लिए कहीं कोई शांति नहीं है।”