1 “मेरे दास को देखो!
2 वह गलियों में जोर से नहीं बोलेगा।
3 वह कोमल होगा।
4 वह कमजोर अथवा कुचला हुआ तब तक नहीं होगा
5 सच्चे परमेश्वर यहोवा ने ये बातें कही हैं: (यहोवा ने आकाशों को बनाया है। यहोवा ने आकाश को धरती पर ताना है। धरती पर जो कुछ है वह भी उसी ने बनाया है। धरती पर सभी लोगों में वही प्राण फूँकता है। धरती पर जो भी लोग चल फिर रहे हैं, उन सब को वही जीवन प्रदान करता है।)
6 “मैं यहोवा ने तुझ को खरे काम करने को बुलाया है।
7 तू अन्धों की आँखों को प्रकाश देगा और वे देखने लगेंगे।
8 “मैं यहोवा हूँ! मेरा नाम यहोवा है।
9 प्रारम्भ में मैंने कुछ बातें जिनको घटना था,
10 यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ,
11 हे मरुभूमि एवं नगरों और केदार के गाँवों,
12 यहोवा को महिमा दो।
13 यहोवा वीर योद्धा सा बाहर निकलेगा उस व्यक्ति सा जो युद्ध के लिये तत्पर है।
14 “बहुत समय से मैंने कुछ भी नहीं कहा है।
15 मैं पर्वतों — पहाड़ियों को नष्ट कर दूँगा।
16 फिर मैं अन्धों को ऐसी राह दिखाऊँगा जो उनको कभी नहीं दिखाई गयी।
17 किन्तु कुछ लोगों ने मेरा अनुसरण करना छोड़ दिया।
18 “तुम बहरे लोगों को मेरी सुनना चाहिए!
19 कौन है उतना अन्धा जितना मेरा दास है कोई नहीं।
20 वह देखता बहुत है,
21 यहोवा अपने सेवक के साथ सच्चा रहना चाहता है।
22 किन्तु दूसरे लोगों की ओर देखो।
23 तुममें से क्या कोई भी इसे सुनता है क्या तुममें से किसी को भी इस बात की परवाह है और क्या कोई सुनता है कि भविष्य में तुम्हारे साथ क्या होनेवाला है
24 याकूब और इस्राएल की सम्पत्ति लोगों को किसने लेने दी यहोवा ने ही उन्हें ऐसा करने दिया! हमने यहोवा के विरुद्ध पाप किया था। सो यहोवा ने लोगों को हमारी सम्पत्ति छीनने दी। इस्राएल के लोग उस ढंग से जीना नहीं चाहते थे जिस ढंग से यहोवा चाहता था। इस्राएल के लोगों ने उसकी शिक्षा पर कान नहीं दिया।
25 सो यहोवा उन पर क्रोधित हो गया। यहोवा ने उनके विरुद्ध भयानक लड़ाईयाँ भड़कवा दीं। यह ऐसे हुआ जैसे इस्राएल के लोग आग में जल रहे हों और वे जान ही न पाये हों कि क्या हो रहा है। यह ऐसा था जैसे वे जल रहे हों। किन्तु उन्होंने जो वस्तुएँ घट रही थीं, उन्हें समझने का जतन ही नहीं किया।