1 तुम्हारा परमेश्वर कहता है,
2 तू दया से बातें कर यरूशलेम से!
3 सुनो! एक व्यक्ति का जोर से पुकारता हुआ स्वर:
4 हर घाटी को भर दो।
5 तब यहोवा की महिमा प्रगट होगी।
6 एक वाणी मुखरित हुई, उसने कहा, “बोलो!”
7 एक शक्तिशाली आँधी यहोवा की ओर से उस घास पर चलती है,
8 घास मर जाती है और जंगली फूल नष्ट हो जाता है।
9 हे, सिय्योन, तेरे पास सुसन्देश कहने को है,
10 मेरा स्वामी यहोवा शक्ति के साथ आ रहा है।
11 यहोवा अपने लोगों की वैसे ही अगुवाई करेगा जैसे कोई गड़ेरिया अपने भेड़ों की अगुवाई करता है।
12 किसने अँजली में भर कर समुद्र को नाप दिया किसने हाथ से आकाश को नाप दिया
13 यहोवा की आत्मा को किसी व्यक्ति ने यह नहीं बताया कि उसे क्या करना था।
14 क्या यहोवा ने किसी से सहायता माँगी?
15 देखो, जगत के सारे देश घड़े में एक छोटी बूंद जैसे हैं।
16 लबानोन के सारे वृक्ष भी काफी नहीं है कि उन्हें यहोवा के लिये जलाया जाये।
17 परमेश्वर की तुलना में विश्व के सभी राष्ट्र कुछ भी नहीं हैं।
18 क्या तुम परमेश्वर की तुलना किसी भी वस्तु से कर सकते हो नहीं! क्या तुम परमेश्वर का चित्र बना सकते हो नहीं!
19 कुन्तु कुछ लोग ऐसे हैं जो पत्थर और लकड़ी की मूर्तियाँ बनाते हैं और उन्हें देवता कहते हैं।
20 सो वह व्यक्ति आधार के लिये एक विशेष प्रकार की लकड़ी चुनता है जो सड़ती नहीं है।
21 निश्चय ही, तुम सच्चाई जानते हो, बोलो निश्चय ही तुमने सुना है!
22 यहोवा ही सच्चा परमेश्वर है!
23 सच्चा परमेश्वर शासकों को महत्त्वहीन बना देता है।
24 वे शासक ऐसे हैं जेसे वे पौधे जिन्हें धरती में रोपा गया हो,
25 “क्या तुम किसी से भी मेरी तुलना कर सकते हो नहीं!
26 ऊपर आकाशों को देखो।
27 हे याकूब, यह सच है!
28 सचमुच तूने सुना है और जानता है कि यहोवा परमेश्वर बुद्धिमान है।
29 यहोवा शक्तिहीनों को शक्तिशाली बनने में सहायता देता है।
30 युवक थकते हैं और उन्हें विश्राम की जरुरत पड़ जाती है।
31 किन्तु वे लोग जो यहोवा के भरोसे हैं फिर से शक्तिशाली बन जाते हैं।