1 सोर के विषय में दु:खद सन्देश:
2 हे समुद्र के निकट रहने वाले लोगों,
3 वे लोग अनाज की तलाश में समुद्रों में यात्रा करते थे।
4 हे सीदोन, तुझे शर्म आनी चाहिए।
5 मिस्र सोर का समाचार सुनेगा
6 तेरे जलयान तर्शीश को लौट जाने चाहिए।
7 बीते दिनों में तुमने सोर नगर का रस लिया।
8 सोर के नगर ने बहुत सारे नेता पैदा किये।
9 हाँ, सर्वशक्तिमान यहोवा ने वे योजनाएँ बनायी थी।
10 हे तर्शीश के जहाज़ो तुम अपने देश को लौट जाओ।
11 यहोवा ने अपना हाथ सागर के ऊपर फैलाया है और राज्यों को कँपा दिया।
12 यहोवा कहता है, हे! सीदोन की कुँवारी पुत्री, तुझे नष्ट किया जायेगा।
13 अत: सोर के निवासी कहा करते हैं, “बाबुल के लोग हम को बचायेंगे!”
14 सो तर्शीश के जलयानों तुम विलाप करो।
15 सत्तर वर्ष तक लोग सोर को भूल जायेंगे। (यह समय, किसी राजा के शासन काल के बराबर समय माना जाता था।) सत्तर वर्ष के बाद, सोर एक वेश्या के समान हो जायेगा। इस गीत में:
16 “हे वेश्या! जिसे पुरुषों ने भुला दिया।
17 सत्तर वर्ष के बाद, परमेश्वर सोर के विषय में फिर विचार करेगा और वह उसे एक निर्णय देगा। सोर में फिर से व्यापार होने लगेगा। धरती के सभी देशों के लिये सोर एक वेश्या के समान हो जायेगा।
18 किन्तु सोर जिस धन को कमायेगा, उसको रख नहीं पायेगा। सोर का अपने व्यापार से हुआ लाभ यहोवा के लिये बचाकर रखा जायेगा। सोर उस लाभ को उन लोगों को दे देगा जो यहोवा की सेवा करते हैं। इसलिये यहोवा के सेवक भर पेट खाना खायेंगे और अच्छे कपड़े पहनेंगे।