1 सागर के मरुप्रदेश के बारे में दु:खद सन्देश।
2 मैंने कुछ देखा है जो बहुत ही भयानक है और घटने ही वाला है।
3 मैंने यें भयानक बातें देखी और अब मैं बहुत डर गया हूँ।
4 मैं चिन्तित हूँ और भय से थर—थर काँप रहा हूँ।
5 लोग सोचते हैं, सब कुछ ठीक है।
6 मेरे स्वामी ने मुझे ये बातें बतायी हैं, “जा और नगर की रक्षा के लिए किसी व्यक्ति को ढूँढ।
7 यदि वह रखवाला घुड़सवारों की, गधों की अथवा ऊँटों की पंक्तियों को देखें तो उसे सावधानी के साथ सुनना चाहिये।”
8 सो फिर वह पहरेदार जोर से बोला पहरेदार ने कहा,
9 देखो! वे आ रहे हैं!
10 यशायाह ने कहा, “हे खलिहान में अनाज की तरह रौंदे गए मेरे लोगों, मैंने सर्वशक्तिमान यहोवा, इस्राएल के परमेश्वर से जो कुछ सुना है, सब तुम्हें बता दिया है।”
11 दूमा के लिये दु:खद सन्देश:
12 पहरेदार ने कहा,
13 अरब के लिये दु:खद सन्देश।
14 कुछ प्यासे यात्रियों को पीने को पानी दो।
15 वे लोग ऐसी तलवारों से भाग रहे थे
16 मेरे स्वामी यहोवा ने मुझे बताया था कि ऐसी बातें घटेंगी। यहोवा ने कहा था, “एक वर्ष में (एक ऐसा ढँग जिससे मजदूर किराये का समय को गिनता है।) केदार का वैभव नष्ट होजायेगा।
17 उस समय केदार के थोड़े से धनुषधारी, प्रतापी सैनिक ही जीवित बच पायेंगे।” इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने मुझे ये बातें बताई थीं।