1 तब यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा,
2 “मनुष्य के पुत्र, इस्राएल के परिवार को यह कहानी सुनाओ। उनसे पूछो कि इसका तात्पर्य क्या है
3 उनसे कहो:
4 उस उकाब ने उस विशाल देवदार वृक्ष (लबानोन) के माथे को तोड़ डालाऔर उसे कनान ले गया।
5 तब उकाब ने बीजों (लोगों) में से कुछ को कनान से लिया।
6 बीज उगे और वे अंगूर की बेल बने।
7 तब दूसरे बड़े पंखों वाले उकाब ने अंगूर की बेल को देखा।
8 अगूंर की बेल अच्छे खेत में बोई गई थी।
9 मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कही,
10 क्या यह बेल वहाँ बढ़ेगी जहाँ बोई गई हैं नहीं, गर्म पुरवाई चलेगी
11 यहोवा का वचन मुझे मिला। उसने कहा,
12 “इस कहानी की व्याख्या इस्राएल के लोगों के बीच करो, वे सदा मेरे विरुद्ध जाते हैं। उनसे यह कहो: पहला उकाब (नबूकदनेस्सर) बाबुल का राजा है। वह यरूशलेम आया और राजा तथा अन्य प्रमुखों को ले गया। वह उन्हें बाबुल लाया।
13 तब नबूकदनेस्सर ने राजा के परिवार के एक व्यक्ति से साथ सन्धि की। नबूकदनेस्सर ने उस व्यक्ति को प्रतिज्ञा करने के लिये विवश किया। इस प्रकार इस व्यक्ति ने नबूकदनेस्सर के प्रति राजभक्त रहने की प्रतिज्ञा की। नबूकदनेस्सर ने इस व्यक्ति को यहूदा का नया राजा बनाया। तब उसने सभी शक्तिशाली व्यक्तियों को यहूदा से बाहर निकाला।
14 इस प्रकार यहूदा एक दुर्बल राज्य बन गया, जो राजा नबूकदनेस्सर के विरुद्ध नहीं उठ सकता था। यहूदा के नये राजा के साथ नबूकदनेस्सर ने जो सन्धि की थी उसका पालन करने के लिये लोग विवश किये गये।
15 किन्तु इस नये राजा ने किसी भी प्रकार नबूकदनेस्सर के विरुद्ध विद्रोह करने का प्रयत्न किया। उसने सहायता माँगने के लिये मिस्र को दूत भेजे। नये राजा ने बहुत से घोड़े और सैनिक मांगे। इस दशा में, क्या तुम समझते हो कि यहूदा का राजा सफल होगा क्या तुम समझते हो कि नये राजा के पास पर्याप्त शक्ति होगी कि वह सन्धि को तोड़कर दण्ड से बच सकेगा”
16 मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “मैं अपने जीवन की शपथ खाकर वचन देता हूँ कि यह नया राजा बाबुल में मरेगा! नबूकदनेस्सर ने इस व्यक्ति को यहूदा का नया राजा बनाया। किन्तु इस व्यक्ति ने नबूकदनेस्सर के साथ की हुई अपनी प्रतिज्ञा तोड़ी। इस नये राजा ने सन्धि की उपेक्षा की।
17 मिस्र का राजा यहूदा के राजा की रक्षा करने में समर्थ नहीं होगा। वह बड़ी संख्या में सैनिक भेज सकता है किन्तु मिस्र की महान शक्ति यहूदा की रक्षी नहीं कर सकेगी। नबूकदनेस्सर की सेनायें नगर पर अधिकार के लिये कच्ची सड़कें और मिट्टी की दीवारें बनाएंगी। बड़ी संख्या में लोग मरेंगे।
18 किन्तु यहूदा का राजा बचकर निकल नहीं सकेगा। क्यों क्योंकि उसने अपने सन्धि की उपेक्षा की। उसने नबूकदनेस्सर को दिये अपने वचन को तोड़ा।”
19 मेरा स्वामी यहोवा यह वचन देता है, “मैं अपने जीवन की शपथ खाकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं यहूदा के राजा को दण्ड दूँगा। क्यों क्योंकि उसने मेरी चेतावनियों की उपेक्षा की। उसने हमारी सन्धि को तोड़ा।
20 मैं अपना जाल फैलाऊँगा और वह इसमें फंसेगा। मैं उस बाबुल लाऊँगा तथा मैं उसे उस स्थान में दण्ड दूँगा। मैं उसे दण्ड दूँगा क्योंकि वह मेरे विरुद्ध उठा।
21 मैं उसकी सेना को नष्ट करूँगा। मैं उसके सर्वोत्तम सैनिकों को नष्ट करूँगा और बचे हुए लोगों को हवा में उड़ा दूँगा। तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ और मैंने ये बातें तुमसे कही थीं।”
22 मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कही थीं:
23 मैं स्वयं इसे इस्राएल में ऊँचे पर्वत पर लगाऊँगा।
24 तब अन्य वृक्ष उसे जानेंगे कि मैं ऊँचे वृक्षों को भूमि पर गिराता हूँ।