Deuteronômio 32

HIN2010

1 “हे गगन, सुन मैं बोलूँगा,

2 बहसेंगे वर्षा सम मेरे उपदेश,

3 परमेश्वर का नाम सुनाएगी मैं कहूँगा,

4 “वह (यहोवा) हमारी चट्टान है —

5 तुम लोगों ने दुर्व्यवहार किया उससे अतः नहीं उसके जन तुम सच्चे।

6 चाहिए न वह व्यवहार तुम्हारा यहोवा को,

7 “याद करो बीते हुए दिनों को

8 सर्वोच्च परमेश्वर न राष्ट्रों को

9 योहवा की विरासत है उसके लोग;

10 “यहोवा ने याकूब (इस्राएल) को पाया मरू में,

11 यहोवा ने फैलाए पर, उठा लिया इस्राएलियों को,

12 अकेले यहोवा ले आया याकूब को,

13 यहोवा ने चढ़ाया याकूब को पृथ्वी के ऊंचे स्थानों पर,

14 मक्खन दिया झुण्डों से, दूध दिया रेवड़ों से,

15 “किन्तु यशूरून मोटा हो, सांड सा लात मारता,

16 ईर्ष्यालु बनाया यहोवा को, अन्य देव पूजा कर! उसके जन ने;

17 बलि दी दानवों को जो सच्चे देव नही उन देवों को बलि दी उसने जिसका उनको ज्ञान नहीं।

18 तुमने छोड़ा अपने शैल यहोवा को भुलाया

19 “यहोवा ने देखा यह, इन्कार किया जन को अपना कहने से,

20 तब यहोवा ने कहा,

21 मूर्तियों की पूजा करके उन्होंने मुझमें ईर्ष्या उत्पन्न की वे मूर्तियाँ ईश्वर नहीं हैं।

22 क्रोध हमारा सुलगा चुका आग कहीं,

23 “‘मैं इस्राएलियों पर विपत्ति लाऊँगा,

24 वे भूखे, क्षीण और दुर्बल होंगे,

25 तलवारें सड़कों पर उनको सन्तति मिटा देगी,

26 “‘मैं कहूँगा, इस्राएलयों को दूर उड़ाऊँगा।

27 मुझे भय था कि, शत्रु कहेंगे

28 “इस्राएल के शत्रु मूर्ख राष्ट्र हैं

29 यदि शत्रु समझदार होत

30 एक कैसे पीछा करता सहस्र को?

31 शैल शत्रुओं को नहीं हमारे शैल यहोवा सदृश

32 सदोम और अमोरा की दाखलताओं के समान कड़वे हैं उनके गुच्छे अंगूर के।

33 उनकी दाखमधु साँपों के विष जैसी है और क्रूर कालकूट अस्प नाम का।

34 यहोवा ने कहा, “मैं उस दण्ड से रक्षा करता हूँ।

35 केवल मैं हूँ देने वाला दण्ड मैं ही देता लोगों को अपराधों का बदला,

36 “यहोवा न्याय करेगा अपने जन का।

37 पूछेगा वह तब,

38 लोगों के ये देव, बलि की चर्बी खाते थे,

39 देखो, अब केवल मैं ही परमेश्वर हूँ।

40 आकाश को हाथ उठा मैं वचन देता हूँ।

41 मैं तेज करूँगा अपनी बिजली की तलवार।

42 मेरे शत्रु मारे जाऐंगे, बन्दी होंगे।

43 “होगा हर्षित सब संसार परमेश्वर के लोगों से क्यों?

44 मूसा आया और इस्राएल के सभी लोगों को सुनने के लिये यह गीत पूरा गाया। नून का पुत्र यहोशू मूसा के साथ था।

45 जब मूसा ने लोगों को यह उपदेश देना समाप्त किया

46 तब उसने उनसे कहा, “तुम्हें निश्चय करना चाहिए कि तुम उन सभी आदेशों को याद रखोगे जिसे मैं आज तुम्हें बता रहा हूँ और तुम्हें अपने बच्चों को यह बताना चाहिए कि इन व्यवस्था के आदेशों का वे पूरी तरह पालने करें।

47 यह मत समझो कि ये उपदेश महत्वपूर्ण नहीं हैं! ये तुम्हारा जीवन है! इन उपदेशों से तुम उस यरदन नदी के पार के देश में लम्बे समय तक रहोगे जिसे लेने के लिये तुम तैयार हो।”

48 यहोवा ने उसी दिन मूसा से बातें कीं। यहोवा ने कहा,

49 “अबारीम पर्वत पर रजाओ। यरीहो नगर से होकर मोआब प्रदेश में नबो पर्वत पर जाओ। तब तुम उस कनान प्रदेश को देख सकते हो जिसे मैं इस्राएल के लोगों को रहने के लिए दे रहा हूँ।

50 तुम उस पर्वत पर मरोगे। तुम वैसे ही अपने उन लोगों से मिलोगे जो मर गए हैं जैसे तुम्हारे भाई हारून होर पर्वत पर मरा और अपने लोगों में मिला।

51 क्यों? क्योंकि जब तुम सीन की मरुभूमि में कादेश के निकट मरीबा के जलाशयों के पास थे तब मेरे विरुद्ध पाप किया था और इस्राएल के लोगों ने उसे वहाँ देखा था। तुमने मेरा सम्मान नहीं किया और तुमने यह लोगों को नहीं दिखाया कि मैं पवित्र हूँ।

52 इसलिए अब तुम अपने सामने उस देश को देख सकते हो किन्तु तुम उस देश मे जा नहीं सकते जिसे मैं इस्राएल के लोगों को दे रहा हूँ।”

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