1 क्षयर्ष नावोन राजान दाहड़ा मा यी वाते हयी; यो त्यो क्षयर्ष छे, जो एक सोव वीस ने सात देशो पर, मोतलोब इथियोपिया गोथु हिन्दुसतान लोगुन राज करतो हुतो।
2 राजा क्षयर्ष क राजोन राजधानी शुशन गढ़ हुतो, त्या राजगादी पोर बोठीन राज कोर रयो हुतो।
3 होंया हुयो आपसा राज क तीसरा साल मा आपसा आखा मुखी आरु कामकरन्या क भोज आप्यो। फारस आरु मादै क सेनापति आरु प्रान्त-प्रान्त क प्रधान आरु हाकिम ओका अगळ आय गुया।
4 भोज करवानेन तिहवार छोव महिना तक वाळीयो। आरु पाहंतीरियान को हेका राज वाड़ान धन आरु हेकी राज करनेन शान देखड़तो रियो।
5 ओतरा दाहड़ा क वितने पोर राजा न काय नाना काय मोटा उना आखा क वी ज शुशन नावोन राजगढ़ मा एकठा हुया हुता, राजभवन क वारी मा आँगना मा सात दाहड़ा लगुन भोज आप्यो।
6 होंया क परदा श्वेत आरु निळा सुत क हुता, आरु सन आरु जामन्या रोंगोन। बठनेन पाटला सी चाँदी क छल्ला मा, संगमरमर क बोनला फोरस्या पोर धरी हुयी हतली।
7 उना भोज मा राजा क योग्य दाखमधु भाति-भातिन रीते क सोना क टाहरा मा डालीन राजा क उदारता सी घनात भेळ पावतला।
8 पीनो ते कायदा ओनसारे हयतो हुतो, जोसो चाहे तोसो पाळतला हुता; काहकी राजा न ते आपसा भवन क आखा भण्डारियो क हुकुम आपता हुता, की ज पाहनतरीया जसा चाहे ओका भेळ तोसाज वेवहार कोरनो।
9 रानी वशती न वी राजा क्षयर्ष क भवन मा बायरा क भोज आप्या।
10 सातवे दाहड़े, जोत्यार राजा क मोन दाखमधु मा मगन हुतो, तोत्यार हुयो महुमान, बिजता, हर्बोन, बिगता, अबगता, जेतेर आरु कर्कस नावोन सातु गोतराड़ा क ज क्षयर्ष राजा क अगळ सेवा चाखरी कोर्या कोरता हुता, हुकुम,
11 की रानी वशती क राजमुकुट धारण कोर्यो हुयो राजा क अगळ ली आवु; जेरेसी कि देश-देश क लोगहन आरु हाकिमो पोर ओकी घाटाळो प्रगट होय जाय; काहकी हुये देखने मा घाटाळो हुतो।
12 खोजो क लारे राजा नी यी हुकुम मिळी रानी वशती न आवने सी मोना कोर्यो। एना पोर राजा मोटा रीसवाईन जळने लाग्यो।
13 तोत्यार राजा न टेमे-टेमे क भेद जाननेवाळा पंडितो सी पुछ्यो (राजा ते नीति आरु नियाव क आखा गियानियो सी असोज कोरतो हुतो।
14 ओका पास कर्शना, शेतार, अदमाता, तर्शीश, मेरेस, मर्सना, आरु ममुकान नावोन फारस, आरु मादै क सात प्रधान हुता, ज राजा क दर्शन कोरता आरु राज मा खास-खास पदो पोर नेवाड़ कोर्यो गया हुता।)
15 राजा न पुछ्या, “रानी वशती न राजा क्षयर्ष नु हेर लारे आपाड़ला हुकुम क तुड़नो कोर्या, ती नीतिन ओनसारे ओका भेळ काय कोर्यो जाय?”
16 तोत्यार ममुकान न राजा आरु हाकिमो नु हाजरी मा जपाप आप्यो, “रानी वशती न ज भुंडो काम कर्यो छे, हुयो नी केवल राजा सी बाखुन आखा हाकिमो सी आरु उना आखा देशों क लोगहन सी वी ज राजा क्षयर्ष क आखा प्रान्तो मा रोहे छे।
17 काहकी रानी क एना काम नु चर्चा आखा बायरा मा होयसे आरु जोत्यार यो कोयो जासे, ‘राजा क्षयर्ष न रानी वशती क आपसे अगळ ली आवने नु हुकुम आप्यो पुन हुयी नी आवी,’ ती हुये वी आपसा-आपसा घोरवाळा क तुच्छ जानने लागसे।
18 आजुन दाहड़े फारस आरु मादी हाकिमो नु बायरा जे रानी नु यी वात सोमळायो छे ती हुये वी राजा क आखा हाकिमो सी असोज कोहने लागसे; एने रीते घनात घाड़ाय आरु रीस पोयदा होयसे।
19 कदाम राजा क स्वीकार होय, ती यो हुकुम निकाळे, आरु फारसियो आरु मादीयो क कानुन मा लिखी वी जाय, जेरेसी कदाम बोदल नी सके, की रानी वशती राजा क्षयर्ष क अगळ ओळी कोदी आवने नी पावे, आरु राजा पटरानी क पद कुदा दिसरा क आप देये तेरेसी वारु होय।
20 अत: जोत्यार राजा नु यो हुकुम ओका आखा राज मा सोमळायो जासे, ती आखा बायरा, आपसा-आपसा घरवाळा क चाहे गरीब होय एने अमीर, आदरमान कोरती रोहसे।”
21 यी वात राजा आरु हाकिमो क पसन्द आवी आरु राजा न ममुकान नु सम्मति मान लेदो आरु आपसा राज मा,
22 अर्थात् होरीक राजोन क आकड़ा मा आरु होरीक जाति नु बुली मा चिट्ठियाँ मुकळ्या, की आखा मानसे आपसा-आपसा घर मा होक चालाड़े, आरु आपसी जाति नु बुली बुल्या कोरे।