1 सुरुवात हे भगवान हमर पुरखन लग अउ ग्यानी मनसेन के दवारा कइन मेर के बात करिस।
2 पय हइ आखरी रोज हे भगवान अपन टोरवा के दवारा, हमर लग बात करिस अउ ऊ अपन टोरवा के दवारा दुनिया के सगलू चीजन के बनाइस अउ उहै के सगलू कुछु हक के रूप हे दय हबै।
3 ऊ टोरवा भगवान के महिमा के उजेड हबै, भगवान खुद के दरसाथै अउ अपन सक्ति के बचन के दवारा दुनिया के बनाय रखथै अउ सगलू मनसेन के पापन के छमा सुध्द करके भगवान के दहिना पल्ला ऊंच हे जाय के बइठे हबै।
4 अउ ओखर पदवी स्वरगदूतन लग ऊंच ठहरिस, काखे जउन नाम उके राजगद्दी हे मिले हबै, उन ऊ नाम लग कहुं जादा महान हबै।
5 काखे भगवान अपन स्वरगदूत लग असना कबहुन नेहको कहिस,
6 अउ फेर भगवान अपन अकलउता टोरवा के दुनिया हे लानथै, “तब ऊ स्वरगदूतन लग कथै, तुम सब मोर टोरवा के महिमा करा।”
7 अउ स्वरगदूतन के बारे हे हइ कथै,
8 पय टोरवा के बारे हे कथै
10 अउ ऊ इहो कथै,
12 अउ ऊ खुरथा पइजामा के जसना बदल जही, पय तै कबहुन नेहको बदलही।
13 भगवान कबहुन कउनो स्वरगदूत लग असना नेहको कहिस,
14 हइ सगलू आतमा भगवान के सेबा टहल नेहको करथै, का सगलू स्वरगदूत हरवाह नेहको, उन मनसेन के सेबा के निता पठोय जथै, जउन मुकति के हकदार हबै।