1 मूसा कर नियम के तो आमै बाले निक्खा बातन के चिन्हा हबै, उनखर नियम के जसना हर साल बलि चढाय जथै। मूसा कर नियम उन बलि के दवारा किरतन भजन करै बालेन के बिलकुन पूर सुध्द नेहको दइ सकथै।
2 अगर असना होतिस ता का उनखर बलि चढावा बन्द नेहको हुइ जातिस? काखे फेर तो उपास करै बाले अक्कै बेर हे सबरोज के निता सुध्द हुइ जातिन। अउ अपन पापन के निता फेर कबहुन खुद के पापी नेहको समझतिन।
3 पय अब तो उन बलि के दवारा हर साल पाप के सुरता करवाथै।
4 काखे बइला अउ बोकडा के खून लग पाप मिट नेहको सकथै।
5 इहैनिता जब यीसु हइ दुनिया हे आयके हइ कथै,
6 तै न तो गोरूबलि लग मगन हुइस,
7 इहैनिता मै कथो,
8 ऊ पहिले कहे रथै, “बलि अउ चढावा, गोरूबलि अउ पापबलि नेहको चाही अउ न तै उनखर लग मगन होथस।” अगर हइ सब बलि मूसा कर नियम के जसना चढाय जथै।
9 तब मसीह हइ कथै, “देख, मै तोर इक्छा पूर करे आय हबो।” हइ मेर ऊ पहिले बाले मूसा कर नियम के खतम करथो अउ दूसर नबा नियम ठहराथो।
10 उहै भगवान के इक्छा लग अक्कै बेर सबरोज के निता यीसु मसीह के देह के बलि के दवारा हम पवितर करै गय हबन। बेदी हे बलि चढाथै|alt="Burnt offering on an altar" src="hk00256c.tif" size="col" copy="Horace Knowles ©" ref="10:10"
11 सगलू पुजारी रोज दिना ठाड हुइके अपन सेबा के काम के पूर करथै। उन घरी-घरी अक्ठी मेर के बलि चढाथै जउन पाप के कबहुन दुरिहां नेहको के सकथै।
12 पय पुजारी के जसना मसीह तो पाप के निता, सबरोज निता अक्ठिन बलि चढाय के भगवान के दहिना पल्ला जायके बइठ गइस,
13 अउ उहै टेम लग उके अपन बैरिन के ओखर गोड तरी के पीडा बनाय दय जायके निता ओरगथै।
14 काखे मसीह अक्ठिन बलि के दवारा जउन पवितर करे जथै, उनही सबरोज के निता सिध्द के दइस।
15 एखर निता पवितर आतमो हमही गवाह देथै। काखे ऊ पहिले कथै,
16 “हइ ऊ टीमा हबै जेही मै उनखर लग करिहों।
17 फेर ऊ हइ कथै “मै उनखर पाप अउ अधरम के फेर कबहुं सुरता नेहको करहुं।”
18 अउ फेर जब पाप छमा के दय गय हबै ता पाप के निता कउनो बलि के जरूरतो नेहको हबै।
19 इहैनिता भाई अउ बेहन, अब हम पूर भरोसा करथन कि यीसु के खून के दवारा हम “पवितर आतमा के जिघा” हे घुस सकथन।
20 यीसु हमर निता जिन्दा अउ नबा गली निकार दइस जउन ओखर देह परदा लग हुइके जथै।
21 काखे हमर लिघ्घो अक्ठी असना बड्डे पुजारी हबै, जउन भगवान के घर के साहब हबै।
22 ता आबा हम सही मन अउ पूर बिस्वास के संग अउ अपन पाप लग सुध्द होय के निता हिरदय हे पानी लग झडक अउ अपन देह के सुध्द पानी लग धोय के निस पाप हिरदय लग सगलू बिस्वास के संग भगवान के लिघ्घो आबा।
23 हम अपन आसा के गवाह देय के निता डटे अउ मजबूत बने रही, काखे जउन हमके टीमा करे रहै ऊ बिस्वासओग हबै।
24 हमके हइ बात समझै के हबै, कि हम कसना अक दूसर लग माया अउ अक दूसर के निक्खा काम करै के निता उतसाहित के सकथन।
25 हमर मंडली आमै के निता झइ छांडा, जसना कि कुछ मनसे करथै बकि हम अक दूसरे के हिम्मत बांधी। अउ जसना कि तुम देखत हबा कि ऊ दिन लिघ्घो आउत हबै, ता असना करिहा कि अउ जादा परभु के संगति करिहा।
26 काखे सत्य के ग्यान होय के बादो अगर हम जान बूझ के पाप करथन, ता पाप के निता फेर कउनो बलि बाकी नेहको हबै।
27 पय सजा के अक्ठी बोहत भयानक ओरगे अउ आगी के आंच बाकी हबै, जउन भगवान के बिरोध करै बालेन के नास के देही।
28 जउन कउ मूसा कर नियम के नेहको मानथै, उनही बिना दया करे दुइ या तीन झन के गवाह लग मार डारे जथै।
29 ता सोच लेया कि ऊ मनसे केतका अउ बोहत सजा के कबिल ठहरही, जउन भगवान कर टोरवा के गोड लग कचरिन अउ टीमा के खून के, जेखर दवारा उके पवितर करे रथै, अक्ठी अपवितर चीज मानिन अउ जउन अनुगरह के आतमा के बेज्जती करिन।
30 काखे हम उके जानथन, जउन कहे रथै, “बदला लेयके मोर काम हबै, हे बदला लइहों।” अउ फेर हइ, “परभु अपन मनसेन के नियाव करही।”
31 जिन्दा भगवान के हाथ हे पडैके केतका भयानक बात हबै।
32 कुछ रोज के बाद सुरता करा जब तुम उजेड पाय रहा अउ ओखर बाद जब तुम दुख भोगत बोहत संघर्स करके सामना करत मजबूत बने रइहा।
33 कबहुन तो सब मनसेन के आगू तुमही बेज्जती अउ अतियाचार सहै के पडिस अउ कुछ झन के असना संकट हे पडे हरन के सहभागी बनै के पडिस।
34 अपन जेलियर मनसेन के संग दुख हे उनखर दुख बांटा अउ जब तुम्हर डेरा जइजात के छंडाय लइन, ता अपने-अपन हे जउन नुसकान हुइस उके खुसी-खुसी सुइकार लइन, काखे उन जानथै कि हमर लिघ्घो अभिन्नो कुछ डेरा जइजात हबै जउन सबरोज रही।
35 इहैनिता तुम अपन बिस्वास अउ हिम्मत झइ छंडिहा काखे एखर इनाम बडा हबै।
36 तुमही धीर धरै के जरूरी हबै, जेखर लग भगवान के इक्छा पूर करै के बाद तुमही ऊ मिल जही, जेखर टीमा भगवान करे हबै।
37 ऊ जउन आमै बाले हबै,
38 मोर धरमी काम करै बाले मनसे बिस्वास के दवारा जीवन पइहीं,
39 हम उन मनसेन मेर नेहको हबन, जउन पाछू हटै के कारन नास हुइ जथै, बकि हम उन मनसेन मेर हबन, जउन अपन बिस्वास के दवारा जीवन के पाउथिन।